बुधवार 2 सितंबर 2026 - 06:00
ज्ञान और विवेक के साथ सादेक़ैन की शिक्षाओं पर अमल अनिवार्य है: आगा सय्यद हसन मूसवी

मिलादुन्नबी (स) और सिलसिला-ए-इमामत की छठी कड़ी हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के शुभ जन्मदिवस के अवसर पर जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरीअत शिया के आयोजन में हौज़ा-ए-इल्मिया जामिया बाबुल इल्म, मीरगुंड, बडगाम में एक गरिमापूर्ण मिलाद समारोह आयोजित किया गया। इसमें बड़ी संख्या में उलमा और धार्मिक हस्तियों ने भाग लिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मिलादुन्नबी (स) और सिलसिला-ए-इमामत की छठी कड़ी हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के शुभ जन्मदिवस के अवसर पर जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरीअत शिया के आयोजन में हौज़ा-ए-इल्मिया जामिया बाबुल इल्म, मीरगुंड, बडगाम में एक गरिमापूर्ण मिलाद समारोह आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में उलमा और धार्मिक हस्तियों ने भाग लिया।

ज्ञान और जागरूकता के साथ सादेक़ैन की शिक्षाओं पर अमल अनिवार्य है: आगा सय्यद हसन मूसवी

इस अवसर पर अंजुमन-ए-शरीअत शिया की ओर से मकतबों के लिए तैयार की गई किताब ‘बाग़-ए-ख़ुदा’ का विमोचन भी किया गया।

किताब के विमोचन को धार्मिक शिक्षा के प्रसार और नई पीढ़ी की बेहतर धार्मिक एवं नैतिक तरबीयत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

ज्ञान और जागरूकता के साथ सादेक़ैन की शिक्षाओं पर अमल अनिवार्य है: आगा सय्यद हसन मूसवी

मिलाद समारोह के बाद संगठन के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सैयद हसन मूसा्वी अस-सफ़वी के नेतृत्व में परंपरा के अनुसार एक भव्य मिलाद जुलूस निकाला गया, जो केंद्रीय इमामबाड़ा बडगाम पहुंचकर समाप्त हुआ।

मिलाद जुलूस में जामिया बाबुल इल्म और उसकी विभिन्न शाखाओं से जुड़े मकतबों के हजारों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और शिक्षिकाओं, अंजुमन-ए-शरीअत शिया के सदस्यों व कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में आम लोगों ने श्रद्धा और सम्मान के साथ भाग लिया। जुलूस में शामिल लोगों ने दरूद व सलाम और नातिया कलाम के माध्यम से पैग़म्बरे इस्लाम (स) के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की।

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इससे पहले हौज़ा-ए-इल्मिया जामिया बाबुल इल्म, मीरगुंड में आयोजित मिलाद समारोह को संबोधित करते हुए जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरीअत शिया के महासचिव हुज्जतुल इस्लाम सैयद मुज्तबा अब्बास मूसा्वी ने कहा कि हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) की पवित्र सीरत पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा के लिए एक व्यापक और संपूर्ण जीवन व्यवस्था तथा मार्गदर्शन का स्रोत है। इसमें एकता, भाईचारे, ज्ञान, उच्च नैतिक मूल्यों, न्याय और इंसाफ तथा ज़ुल्म व अन्याय के खिलाफ दृढ़ता की शिक्षा दी गई है।

उन्होंने मिलादुन्नबी (स) और हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के शुभ जन्मदिवस के अवसर पर उम्मत-ए-मुस्लिमा को बधाई देते हुए सप्ताह-ए-वहदत के महत्व पर जोर दिया और कहा कि वर्तमान दौर में धार्मिक शिक्षा, वैचारिक जागरूकता तथा नई पीढ़ी की प्रभावी नैतिक और शैक्षिक तरबीयत पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गई है।

मौलाना सैयद मुज्तबा अब्बास मूसा्वी ने कहा कि समाज में फैलाई जा रही गलत सूचनाओं, निराधार प्रचार और वैचारिक गुमराही का प्रभावी मुकाबला केवल तथ्यों, ज्ञान और सच्चाई के माध्यम से ही किया जा सकता है।

उन्होंने नई पीढ़ी की ऐसी तरबीयत की आवश्यकता पर जोर दिया, जो उन्हें धार्मिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के साथ-साथ ज्ञान और जागरूकता से भी संपन्न करे, ताकि वे कुरआन को समझने वाले, अच्छे चरित्र वाले तथा हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) और अहले बैत (अ) की शिक्षाओं के सच्चे अनुयायी बनकर समाज और उम्मत-ए-मुस्लिमा के निर्माण में सकारात्मक और प्रभावी भूमिका निभा सकें।

जम्मू-कश्मीर अंजुमन-ए-शरीअत शिया के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सैयद हसन मूसा्वी ने अपने संबोधन में कहा कि हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) के शुभ जन्म का वास्तविक उत्सव केवल खुशी, भावनाओं और श्रद्धा के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक मांग यह है कि रसूले अकरम (स) के संदेश और शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए।

ज्ञान और जागरूकता के साथ सादेक़ैन की शिक्षाओं पर अमल अनिवार्य है: आगा सय्यद हसन मूसवी

उन्होंने मिलादुन्नबी (स) और हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के शुभ जन्मदिवस के अवसर पर उम्मत-ए-मुस्लिमा को बधाई देते हुए कहा कि मिलाद का वास्तविक संदेश ज्ञान, जागरूकता, नैतिकता और चरित्र निर्माण है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को ज्ञान और जागरूकता से संपन्न करना समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है, क्योंकि एक जागरूक, शिक्षित और अच्छे चरित्र वाली पीढ़ी ही एक मजबूत, सम्मानित और बेहतर समाज की नींव रख सकती है।

आगा सैयद हसन मूसा्वी ने कहा कि ज्ञान और वैचारिक जागरूकता ज़ुल्म, अन्याय और शोषण का मुकाबला करने का एक प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे शिक्षा, ज्ञान, शोध, उच्च नैतिकता और अच्छे चरित्र को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं तथा न्याय, समानता, भाईचारे और इस्लामी मूल्यों पर आधारित एक बेहतर समाज की स्थापना के लिए अपनी प्रभावी भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) की पवित्र सीरत और हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की वैज्ञानिक एवं वैचारिक विरासत आज भी पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। यदि इन महान हस्तियों की शिक्षाओं को व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन में लागू किया जाए, तो अज्ञानता, नफरत, ज़ुल्म और अन्याय से मुक्त एक बेहतर समाज का निर्माण संभव है।

ज्ञान और जागरूकता के साथ सादेक़ैन की शिक्षाओं पर अमल अनिवार्य है: आगा सय्यद हसन मूसवी

मिलाद समारोह और जुलूस के समापन पर देश और राष्ट्र की सुरक्षा, उम्मत-ए-मुस्लिमा की एकता तथा शांति और भाईचारे के प्रसार के लिए विशेष दुआएं की गईं।

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